Essay On Sada Jeevan Jach Vichar Sagar

El bajo “STUDIO EE” reúne la detallada y compleja mezcla de lo clásico y lo moderno. Con un diseño de pastillas único, bellas mezclas de colores transparentes, y finos tops laminados de maderas finas, nuestro bajo premier no solo presenta un bajo al máximo de detalle de construcción sino el bajo más versátil que un bajista profesional pueda poner en sus manos. Cierto, llama mucho la atención las combinaciones de colores y el ‘look’, pero en ANMIEK lo que más nos interesa es el sonido, así que eso sigue teniendo primer lugar.
El radio de 241mm le da el ‘feel’ más moderno

CUERPO Y CONSTRUCCION (BODY AND CONSTRUCTION)
Cuerpo (Body): Aliso (Alder)
Cuello (Neck): Maple duro canadiense (Canadian Hard Maple)
Diapasón (Fingerboard): Maple (Hard maple)
Incrustraciones o colores en diapasón (Inlays and colors on fingerboard): Madre perla (mother of pearl), Cuadros negros (black blocks)
Radio (Radius): 241mm (9.5’’)
Trastos (Frets): 20
Escala (Scale): 34’’
Anchura en Cejuela (Width at Nut): 38mm
Herrajes (Hardware): Cromados (Chrome)
Afinadores (Tuners): Hipshot
Puente (Bridge): Anmiek Vintage Style

ELECTRONICA (ELECTRONICS)
Pastillas/Micrófonos (Pickups): Anmiek Custom J Set
Preamp: Anmiek Preamp
Controles en Preamp (Preamp Controls): Volumen Master y Tono/Mezcla de Pastillas/Control de Agudos/Control de Medios/Control de Graves (Master Volume and Tone/ Treble Control/ Mid Control/ Bass Controls. Switch de Activo/Pasivo (Passive/Active Toggle Switch)

COLORES Y ACABADOS (COLORS AND FINISHES)
Colores (Colors): Negro , Azul “aqua”, Rojo y Sunburst (todos transparentes). Black , Aqua Blue, Red and Sunburst (All Transparent Colors)
Contorno en Cuerpo (Binding): Acento de Color Natural (Natural Wood Masked Accent)
Tops: Maple flameado (Flamed Maple), Maple de Tigre (Tiger Maple, aka Quilted Maple)
Acabado del Cuerpo (Body Finish): Brillante (Gloss)
Acabado del cuello (Neck Finish): Opaco (Semi-gloss)
Cabezal igualado en Algunos Instrumentos (Matching Headstock on Some Instruments)

$1699

सादा जीवन पर निबंध | Essay on Simple Life in Hindi!

सादा जीवन उच्च विचार, संतोष और सुख की खान है । सादा जीवन से ही हमारे अन्दर मानवीय तो का समावेश होता है । ऐसे जीवन और आचरण में जो आनन्द, सुख, संतोष, सरलता और पवित्रता है, वह कृत्रिम, ऐश्वर्यशाली और उलझन भरे जीवन में कहां । 

लोभ-लालच, मिथ्याचार, ईर्ष्या, द्वेष आदि सभी दुर्गण सादा जीवन के शत्रु हैं । हमारे संतों ने, धर्मग्रंन्थों ने, साहित्य ने हमेशा सादा जीवन अपनाने की शिक्षा दी है क्योंकि इसी में हमारा भला है । आज के जीवन में जो असंतोष, हड़बड़ी, मारामारी, व्यर्थ की भागदौड़, ईर्ष्या, तनाव, रोग, शोक आदि हैं, वे सब इस सादा जीवन के अभाव के कारण ही हैं ।

हमारी इच्छाओं और वासनाओं का कोई अंत नहीं हैं । ये ही हमारे दु:ख का मूल कारण हैं । इनके कारण ही आज हमारा जीवन इतना उलझनभय, व्यस्त, चिंतामय और दु:खी बना हुआ है । भौतिकता और भोगवाद ने हमारे जीवन में विष घोल दिया है; संग्रह की अनियंत्रित प्रवृत्ति ने सबकुछ उलट-पुलट कर रख दिया है ।

इतनी सुविधाओं, उपकरणों और वैज्ञानिक प्रगति के होते हुए भी आज का मनुष्य कितना अशांत, दु:खी और असहनल असहनशील बन गया है । अपराध बढ़ रह हैं, भ्रष्टाचार फैल रहा है और सब जगह तनाव, निराशा और अशांति है । सुख वस्तुओं के संग्रह या उपकरणों से प्राप्त सुविधा में नहीं है ।

यह तो मन की अनमोल वस्तु है जो सच्चाई, सफाई और सादगी से ही मिल सकती है । हमारी अभिलाषाएं, आकांक्षाएं और आशाएं हमें दिनरात व्यर्थ के कार्यो में हमें व्यस्त रखती हैं, हमारा सुख-चैन और शांति छीन लेती हैं और अंत में हमें कहीं का नहीं रहने देतीं ।

आज हमारा खाना-पीना, रहना-सहना, व्यवहार, विचार आदि बहुत कृत्रिम और उलझन भरे हैं । उन में सादगी और आदर्शों का सर्वथा अभाव है । परिणाम में सर्वत्र मारामारी, हिंसा, अपराध और दुर्गणों का साम्राज्य है । अपने स्वार्थ में अंधा मानव आज दूर की नहीं सोच पाता । उसकी आँखों पर लोभ-लालच और दुराचार का ऐनक चढ़ा हुआ है । वह जैसे भी हो तुरंत धनवान बन जाता चाहता है । इसके लिए बुरे-से-बुरे मार्ग पर वह चलने को तैयार है । इसने जिस स्पर्धा को बढ़ावा दिया है वह सचमुच जानलेवा है ।

आज व्यक्ति अपने ऊपर पानी की तरह पैसा बहा रहा है, और इस पैसे का संग्रह करने के लिए वह बेईमानी, धोखाधड़ी, मिलावट, कालाबाजारी, हिंसा, हत्या आदि में लिप्त है । समाचार-पत्र ऐसे काले कारनामों की खबरों से रंगे पड़े हैं । लूट-खसोट और भागमभाग के इस घृणित वातावरण के लिए हम स्वयं उत्तरदायी हैं ।

हमने सादा जीवन और उच्च विचार का मार्ग त्याग कर यह सर्वनाश का रास्ता अपना लिया है । हमने गांधीजी को भुला दिया है, रामायण और महाभारत के उपदेशों को तिलाजंली दे दी है । सारांश में हम कह सकते हैं कि सादगी और सरलता ही सुख के मूल हैं । इसके विपरीत बनावट, दिखावा और उलझनें दु:ख के मूल है । सादा जीवन जीने से उसमें आदर्शों की स्थापना होती है, उच्च विचार आते हैं और व्यक्ति सुखी एवं संतुष्ट रहता है ।

अनावश्यक महत्वाकांक्षाओं के विस्तार से, धनसंग्रह से और आडम्बर से जीवन में कटुता आती है, वैमनस्य फैलता है और गरीब व अमीर के बीच की खाई गहरी होती जाती है । हमारे पूर्वज हमसे अधिक सुखी थे क्योंकि उनका जीवन सरल था, उनकी आवश्यकताएं न्यून थीं ।

उनके जीवन में आज जैसी सुविधाओं के आडंबर नहीं थे । शरीर से भी वे अधिक स्वस्थ थे क्योंकि विचारों और रहन-सहन का स्वास्थ्य से सीधा सबंध है । सरल व्यक्ति स्वाभाविक रूप से अधिक स्वस्थ और सम्पन्न होता है ।

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